Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
जानिठखांसी के यह 5 पà¥à¤°à¤•ार
1. वातज खांसी : वात के कारण होने वाली खांसी में कफ सूख जाता है, इसलिठइसमें कफ बहà¥à¤¤ कम निकलता है या निकलता ही नहीं है। कफ न निकल पाने के कारण, खांसी लगातार और तेजी से आती है, ताकि कफ निकल जाà¤à¥¤ इस तरह की खांसी में पेट, पसली, आंतों, छाती, कनपटी, गले और सिर में दरà¥à¤¦ à¤à¥€ होने लगता है।
2. पितà¥à¤¤à¤œ खांसी : पितà¥à¤¤ के कारण होने वाली खांसी में कफ निकलता है, जो कि पीले रंग का कड़वा होता है। वमन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पीला व कड़वा पितà¥à¤¤ निकलना, मà¥à¤‚ह से गरà¥à¤® बफारे निकलना, गले, छाती व पेट में जलन होना, मà¥à¤‚ह सूखना, मà¥à¤‚ह का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ कड़वा रहना, पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ लगती रहना, शरीर में गरà¥à¤®à¤¾à¤¹à¤Ÿ या जलने का अनà¥à¤à¤µ होना और खांसी चलना, पितà¥à¤¤à¤œ खांसी के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£ हैं।
3. कफज खांसी : कफ के कारण होने वाली खांसी में कफ बहà¥à¤¤ निकलता है। इसमें जरा-सा खांसते ही कफ आसानी से निकल आता है। कफज खांसी के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में गले व मà¥à¤‚ह का कफ से बार-बार à¤à¤° जाना, सिर में à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨ व दरà¥à¤¦ होना, शरीर में à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨ व आलसà¥à¤¯, मà¥à¤‚ह का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ खराब होना, à¤à¥‹à¤œà¤¨ में अरà¥à¤šà¤¿ और à¤à¥‚ख में कमी के साथ ही गले में खराश व खà¥à¤œà¤²à¥€ और खांसने पर बार-बार गाà¥à¤¾ व चीठा कफ निकलना शामिल है।
4. कà¥à¤·à¤¤à¤œ खांसी : यह खांसी वात, पितà¥à¤¤, कफ, तीनों कारणों से होती है और तीनों से अधिक गंà¤à¥€à¤° à¤à¥€à¥¤ अधिâ€à¤• à¤à¥‹à¤—-विलास (मैथà¥à¤¨) करने, à¤à¤¾à¤°à¥€-à¤à¤°à¤•म बोà¤à¤¾ उठाने, बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चलने, लड़ाई-à¤à¤—ड़ा करते रहने और बलपूरà¥à¤µà¤• किसी वसà¥à¤¤à¥ की गति को रोकने आदि से रूकà¥à¤· शरीर वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के गले में घाव हो जाते हैं और खांसी हो जाती है।इस तरह की खांसी में पहले सूखी खांसी होती है, फिर रकà¥à¤¤ के साथ कफ निकलता है।
5. कà¥à¤·à¤¯à¤œ खांसी : यह खांसी कà¥à¤·à¤¤à¤œ खांसी से à¤à¥€ अधिक गंà¤à¥€à¤°, तकलीफदेह और हानिकारक होती है। गलत खानपान, बहà¥à¤¤ अधिâ€à¤• à¤à¥‹à¤—-विलास, घृणा और शोक के के कारण शरीर की जठरागà¥à¤¨à¤¿ मंद हो जाती है और इनके कारण कफ के साथ खांसी हो जाती है। इस तरह की खांसी में शरीर में दरà¥à¤¦, बà¥à¤–ार, गरà¥à¤®à¤¾à¤¹à¤Ÿ होती है और कà¤à¥€-कà¤à¥€ कमजोरी à¤à¥€ हो जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में सूखी खांसी चलती है, खांसी के साथ पस और खून के साथ बलगम निकलता है। कà¥à¤·à¤¯à¤œ खांसी विशेष तौर से टीबी यानि (तपेदिक) रोग की पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ हो सकती है, इसलिठइसे अनदेखा बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ नहीं करना चाहिà¤à¥¤
| --------------------------- | --------------------------- |